अररिया : कुछ समय पहले एक फिल्म आई थी "कागज" सत्य घटना पर आधारित इस फिल्म में दिखाया गया था कि एक व्यक्ति कैसे अपने जीवित होने का प्रमाण दफ्तर दर दफ्तर घूमकर दे रहा है औए सिस्टम से संघर्ष कर रहा है। कुछ ऐसा हीं नजारा अररिया जिले के भरगामा प्रखंड में देखने को मिला है,जहां दर्जनों की संख्या में वृद्धजन अपने जीवित होने का प्रमाण अधिकारियों के सामने दिखा रहा है और कह रहा है, साहब मैं अभी मरा नहीं- जिंदा हूँ, परन्तु सरकारी आंकड़ों में मुझे मार दिया गया है। सुनने में बड़ा अजीब लगता है लेकिन ये सच है। बताते चलें कि नया भरगामा,सिरसियाकला,सिमरबनी,पैकपार सहित अन्य कई पंचायतों के दर्जनों वृद्धजन एवं विधवा पेंशन के लाभार्थियों का आरोप है कि बिना भौतिक सत्यापन के हीं कई जिंदा लाभार्थियों को मृत दिखाकर सूची जिला कार्यालय में जमा कर दी गई,जिसके बाद उनकी पेंशन रोक दी गई है। बताते चलें कि भरगामा प्रखंड क्षेत्र के सिरसियाकला पंचायत निवासी स्वर्गीय बुलंद मंडल की 76 वर्षीय पत्नी बिलबी देवी ने बताई कि वे सामाजिक सुरक्षा कोषांग कार्यालय,भरगामा का चक्कर लगा-लगाकर थक चुकी है फिर भी वृद्धजन या विधवा पेंशन योजना का लाभ उन्हें नहीं मिल रहा है। उन्होंने अपनी पीड़ा सुनाते हुए कही कि जब भी पेंशन कार्यालय जाते हैं वहां मौजूद कार्यपालक सहायक के द्वारा कहा जाता है कि जाओ बुढ़िया तुम्हारा काम हो गया है,लेकिन जब सरकार के द्वारा पेंशन राशि आवंटन के समय बैंक बैलेंस चेक करते हैं तो निराश होकर खाली हाथ घर लौटना पड़ता है। वहीं सिरसियाकला निवासी स्वर्गीय रुदल मंडल की 66 वर्षीय पत्नी सुगिया देवी ने बताई कि वे पेंशन योजना का लाभ के लिए पिछले कई सालों से सामाजिक सुरक्षा कोषांग कार्यालय,भरगामा का चक्कर काट रही है,लेकिन उनके द्वारा प्रखंड कार्यालय में दिए गए लिखित आवेदन को पढ़ने और उसकी बातों को सुनने को कोई कर्मी या अधिकारी तैयार नहीं हैं। वहीं सिरसियाकला पंचायत निवासी स्वर्गीय रामदेव मंडल की पत्नी अमेरिका देवी ने बताई कि वे विधवा पेंशन योजना के लाभ लेने हेतु एक साल से सामाजिक सुरक्षा कोषांग कार्यालय का चक्कर लगा रही है,लेकिन उनके आवेदन पर आवश्यक पहल नहीं किया जा रहा है। वहीं सिमरबनी निवासी स्वर्गीय किशोरी मंडल के 80 वर्षीय पुत्र नटाय मंडल ने बताया कि सरकारी तंत्र की लापरवाही और तकनीकी खामियों के कारण ई-लाभार्थी पोर्टल पर उनके नाम में त्रुटि कर दिया गया है। जिसके वजह से कई महीनों से उनका एकमात्र सहारा 'पेंशन की राशि' रुका हुआ है। उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा कोषांग कार्यालय में लिखित जानकारी देने के बाद और अधिकारियों के समक्ष बार-बार गुहार लगाने के 6 महीने बीत जाने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो सका है। वहीं खुद को जिंदा साबित करने के लिए वर्षों से सामाजिक सुरक्षा कोषांग कार्यालय का चक्कर काट रहे नया भरगामा निवासी स्वर्गीय मोहन झा के पुत्र कमलकांत झा ने बताया कि वृद्धजन पेंशन के ई-लाभार्थी पोर्टल पर उसे मृत घोषित कर दिया गया है, जिसके वजह से उसे कई महीनों से वृद्धजन पेंशन योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों के सामने जाकर बार-बार ‘मैं जिंदा हूं’ कहने के लिए मजबूर हूँ,लेकिन फिर भी हमारी समस्याओं को सुनने वाला काई नहीं है। वहीं पैकपार निवासी बुजुर्ग शिवनारायण मेहता,रामोतार भगत,बच्चालाल यादव,किशन शर्मा चंद्रकला देवी ने डीएम को दिए गए आवेदन में बताया है कि हमें वृद्धजन पेंशन योजना का लाभ पाने के लिए ऑफिस दर ऑफिस के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, वह भी इसलिए क्योंकि पेंशन योजना के ऑनलाइन पोर्टल पर हमें मृत घोषित कर दिया गया है। जिसके बाद से हमलोग परेशान हो गए हैं और लगातार प्रखंड कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं। आवेदन में कहा गया है कि खुद को जीवित करने के लिए कई बार भरगामा प्रखंड कार्यालय में लिखित आवेदन दिया हूँ, लेकिन 6 महीने के बाद भी हमें सरकारी दस्तावेज एवं ई-लाभार्थी पोर्टल पर जीवित नहीं किया गया है। जिसके वजह से वृद्धजन पेंशन खाते में जमा नहीं हो रही है। ऐसे में आर्थिक स्थिति काफी दयनीय हो गई है और अब जीवन-यापन करने में काफी कठिनाई हो रही है। डीएम को दिए गए आवेदन में यह भी कहा गया है कि पता चला है कि यहां बिना पैसे का कोई काम नहीं होता है। हमलोग पेंशन के सहारे जीने वाले लोग कहां से रूपया देंगे। आपको बता दें कि ये तो महज एक बानगी है ऐसे-ऐसे सैकड़ों वृद्धजन पेंशन के जिंदा लाभार्थियों को ई-लाभार्थी पोर्टल पर मृत घोषित कर दिया गया है। इधर नाम नहीं उजागर करने के शर्त पर दर्जनों लाभार्थियों व कई पंचायत एवं प्रखंड स्तरीय कर्मियों ने बताया कि सामाजिक सुरक्षा कार्यालय में पदस्थापित कार्यपालक सहायक प्रीति कुमारी बिना रिश्वत का कोई भी नया पेंशन या तकनीकी गड़बड़ी समस्या का आवेदन छूना मुनासिब नहीं समझती है। लाभार्थी एवं कर्मियों के इस आरोप के संबंध में प्रीति कुमारी (कार्यपालक सहायक,सामाजिक सुरक्षा कोषांग,भरगामा) से उनका पक्ष जानने के लिए उनके दूरभाष पर संपर्क किया तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि ऐसा कोई बात नहीं है लाभार्थी का आधार कार्ड में कुछ ना कुछ गड़बड़ी होगा जिसके कारण उनका आवेदन जिला कार्यालय में पेंडिंग होगा।
सिस्टम की गलती, सजा बुजुर्ग को
यह मामला केवल एक तकनीकी गलती नहीं,बल्कि सरकारी व्यवस्था की संवेदनहीनता को उजागर करता है। सिस्टम की एंट्री मिस्टेक का खामियाजा सैकड़ों पेंशन लाभार्थी भुगत रहे हैं। चप्पलें घिस गयी, लेकिन फाइलें अब भी टेबल से टेबल घूम रही है। कर्मचारी इसे सिस्टम की गलती बताकर जिम्मेदारी से बचते नजर आते हैं,जबकि भूख और अपमान का सामना बुजुर्ग कर रहा है।
प्रशासन का आश्वासन
इधर,सामाजिक सुरक्षा कोषांग के सहायक निदेशक दिलीप कुमार ने कहा कि पूरे प्रकरण की जांचकर कार्रवाई की जायेगी और त्रुटि सुधार कर पेंशन बहाल की जायेगी। हालांकि, सवाल यह है कि जांच की प्रक्रिया कब पूरी होगी और तब तक उक्त लाभार्थी कैसे जीवन यापन करेंगे..? वहीं इस मामले को लेकर सामाजिक कार्यकर्त्ता ज्योतिष कुमार,रंजय राय,बजरंगी तांती,विनोद मंडल,राकेश कुमार,अरुण यादव ने संयुक्त रूप से कहा कि कल्पना कीजिए, आप जीवित हैं..! आपके फेफड़ों में सांसें चल रही है,आप अपनों के बीच मौजूद हैं, लेकिन सरकारी तंत्र के लिए आप मर चुके हैं। सामाजिक सुरक्षा कोषांग कार्यालय,भरगामा से ऐसी खबर आई है जो प्रशासन की संवेदनशीलता और सिस्टम की लापरवाही की कलई खोलती है।
