फारबिसगंज (अररिया): "जब तक मौत हमें अलग न कर दे"... शादी के इस वचन को फारबिसगंज के हलहलिया पंचायत के वार्ड संख्या पांच में एक बुजुर्ग दंपत्ति ने अक्षरशः जी कर दिखाया। शुक्रवार को यहाँ एक ऐसी घटना घटी जिसने पूरे गांव की आंखों को नम कर दिया। परिवार में गूंज रही शहनाइयों की आवाज अभी थमी भी नहीं थी कि खुशियां मातम में बदल गईं। 80 वर्षीय शुकदेव ठाकुर और उनकी पत्नी राधा देवी ने एक ही घंटे के अंतराल में इस दुनिया को अलविदा कह दिया।
आशीर्वाद देते ही थम गई सांसें
घटना के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार, शुकदेव ठाकुर के पौत्र राजकुमार की शादी गुरुवार को सुपौल के छातापुर निवासी भुवन ठाकुर की पुत्री नूतन कुमारी से हुई थी। शुक्रवार को जब नवविवाहित जोड़ा घर पहुंचा, तो दादा शुकदेव ठाकुर और दादी राधा देवी ने बड़ी ही आत्मीयता से दोनों को आशीर्वाद दिया। आशीर्वाद देने के कुछ ही देर बाद शुकदेव ठाकुर अपनी कुर्सी पर बैठे थे कि अचानक उनके प्राण पखेरू उड़ गए।
पति के वियोग में पत्नी ने भी त्यागे प्राण
घर में कोहराम मच गया, अभी लोग शुकदेव ठाकुर की मौत के सदमे से उबर भी नहीं पाए थे कि उनकी पत्नी राधा देवी को जैसे ही अपने जीवनसाथी के जाने की खबर मिली, वह इस गहरे सदमे को बर्दाश्त नहीं कर सकीं। ठीक एक घंटे के भीतर राधा देवी ने भी दम तोड़ दिया। ग्रामीणों का कहना है कि दोनों के बीच ऐसा प्रेम था कि विछोह की घड़ी में एक ने दूसरे का साथ नहीं छोड़ा।
एक ही चिता पर पंचतत्व में विलीन हुआ दंपत्ति
शुक्रवार को गांव में एक साथ दो अर्थियां निकलीं, तो हर किसी की आंखें भर आईं। शुकदेव ठाकुर और राधा देवी का अंतिम संस्कार एक साथ किया गया। उनके बड़े पुत्र प्रमोद ठाकुर ने अपने माता-पिता को एक ही साथ मुखाग्नि दी। इस दृश्य को देखकर श्मशान घाट पर मौजूद हर शख्स की रूह कांप गई।
शोक संतप्त परिवार:
मृतक अपने पीछे तीन पुत्रों—प्रमोद ठाकुर, चंदन ठाकुर और इंद्रदेव ठाकुर सहित पोते-पोतियों और नाती-नतिनियों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।
