फारबिसगंज नगर के स्थानीय सिद्ध सागर भवन में सनातन सत्संग समिति के तत्वावधान में आयोजित नौ दिवसीय श्री राम कथा के दूसरे दिन व्यास गद्दी से कथावाचक बाल संत श्री हरिदास जी महाराज ने संगत के गुण-दोष पर विस्तार से प्रकाश डाला। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जैसा खाएंगे अन्न वैसा होगा मन, जैसा पिएंगे पानी वैसी होगी वाणी और जैसा करेंगे संग वैसा चढ़ेगा रंग इसलिए मनुष्य को अपने संग का विशेष ध्यान रखना चाहिए।बाल संत श्री हरिदास जी महाराज ने कहा कि कोई भी व्यक्ति जन्म से गलत नहीं होता, न ही उसकी बोली और मन खराब होते हैं, बल्कि संगत के प्रभाव से ही मनुष्य के संस्कार बनते हैं। अच्छे संग से व्यक्ति महात्मा बन जाता है, जबकि कुसंग से वही व्यक्ति दुष्ट प्रवृत्ति का हो सकता है। उन्होंने चेताया कि कुसंग के दुष्प्रभाव से कभी-कभी संत मति में भी बदलाव आ जाता है, इसलिए कुसंग से बचना अत्यंत आवश्यक है।
कथा के दौरान संत जी ने कहा कि 84 लाख योनियों के बाद मनुष्य जीवन प्राप्त होना और वह भी स्वस्थ शरीर के साथ, यह भगवान की विशेष कृपा है। इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को ईश्वर के प्रति कृतज्ञता प्रकट करनी चाहिए।आयोजक शोभा देवी–मुन्नी लाल शाह एवं अनिता देवी–बबलू शाह के सहयोग से आयोजित इस श्री राम कथा एवं दुर्लभ सत्संग के पहले दिन के संदेश को भी श्रद्धालुओं ने स्मरण किया, जिसमें संत श्री ने बताया था कि मनुष्य के जीवन में बात, नींद और काम कभी समाप्त नहीं होते, लेकिन यदि इन्हें नियंत्रित कर लिया जाए तो जीवन में लक्ष्य की प्राप्ति संभव है।
उल्लेखनीय है कि कड़ाके की ठंड के बावजूद न तो सुबह की प्रभातफेरी में और न ही संध्याकालीन कथा में श्रद्धालुओं की आस्था और भक्ति में कोई कमी देखने को मिल रही है। कथास्थल पर राजू ‘राधे-राधे’, हरेंद्र फिटकिरीवाला, मांगी लाल गोलयान, दीपक मेहता, वीरेंद्र कुमार, नवीन झुनझुनवाला, मोती लाल गोलयान, ललित झुनझुनवाला, विभाष गुप्ता, रूपेश चौखानी, सुषमा फिटकिरीवाला सहित कई श्रद्धालु एवं कार्यकर्ता सक्रिय रूप से सेवा में लगे नजर आए।
