चेन्नई : प्रख्यात समाज सेवक पापा विद्याकर द्वारा संचालित गैर-लाभकारी संस्था 'उदवुम करंगल' ने एक बार फिर इंसानियत की अनूठी मिसाल पेश की है। संस्था ने महज छह दिनों के भीतर पश्चिम बंगाल के एक मानसिक रूप से बीमार युवक को रेस्क्यू कर, उसका इलाज कराया और उसे उसके माता-पिता से सुरक्षित मिला दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 25 वर्षीय श्री बौराम हेमराम चार महीने पहले नौकरी की तलाश में चेन्नई आया था। काम न मिलने के कारण वह मानसिक तनाव का शिकार होकर सड़कों पर भटकने लगा। 29 मई 2026 को अन्ना नगर में संस्था के संस्थापक श्री विद्याकर की नज़र इस बदहाल युवक पर पड़ी। उसे तुरंत 'शांतिवनम होम' के डिग्निटी मेन्स ब्लॉक ले जाया गया, जहाँ उसे भोजन, कपड़े और उचित चिकित्सीय उपचार दिया गया।
संस्था के सीनियर सोशल वर्कर श्री श्रीनिवास राव के प्रयासों और गूगल की मदद से युवक के गृह राज्य पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर ज़िले के पतिराजपुर गाँव में उसके परिवार का पता लगाया गया। सूचना मिलते ही बौराम की माँ श्रीमती तालमोयी हासदा और सौतेले पिता मिस्टर मंजू मुर्मू चेन्नई पहुँचे।
3 जून 2026 को श्री विद्याकर और श्रीनिवासन की मौजूदगी में बौराम को उसके भावुक परिवार के सुपुर्द कर दिया गया। संस्था ने उसे एक महीने की मुफ्त दवाइयाँ भी दीं। सन 1983 से कार्यरत 'उदवुम करंगल' अपने 42 वर्षों के सफर में अब तक लगभग 5500 मानसिक रूप से अस्वस्थ मरीज़ों को रेस्क्यू कर उनके परिवारों से मिला चुकी है।
