उन्होंने कहा कि यह पर्व हमारे अंदर चेतना जगाने और भारत को पुन: परम वैभव बनाने का संकल्प दिलाता है। बौद्धिक प्रमुख ने विभिन्न जातियों में बटे हिंदू समाज को एकजुट होने की बात कहते हुए कहा कि विदेशी ताकत हमारे समाज को तोड़ने के लिए जातिवाद की साजिश कर रही है।
उन्होंने लोगों को देश के महापुरुषों की वीरता और देशभक्ति की चर्चा करते हुए कहा कि उनकी वीरता से आज के युवाओं को प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि तिल और गुड़ की तरह बिखरे हिंदू समाज को एकता के सूत्र में पिरोने की आवश्यकता है।
जब तक हिंदू समाज संगठित नहीं होगा, भारत माता के अस्तित्व पर खतरे के बादल मंडराते रहेंगे। कार्यक्रम में स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए बौद्धिक कर्ता ने कहा कि संघ के स्वयंसेवक को भी आज इस संकल्प संक्रमण काल में अपने को बदलने की आवश्यकता है।
मौके पर उपस्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह विभाग संघचालक राम कुमार केसरी जी ,नगर कार्यवाह मंजीत मिश्रा ,जिला शारीरिक प्रमुख आशीष कुमार,विनोद सेठिया,पारस सेठिया सहित कई स्वय सेवक मौजूद थे।
