कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला शिक्षा एवं शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय (डायट) के प्राचार्य मो. मोईनुद्दीन खान, उप-प्राचार्य मो. आफताब आलम तथा समाजसेवी एवं दैनिक जागरण के पत्रकार श्री शत्रुघ्न यादव उपस्थित रहे।
बाल संसद के मंचन में बच्चों ने कोशी-मेची परियोजना को केवल नहर निर्माण तक सीमित रखने के बजाय इसे पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास से जोड़ने का संदेश दिया। विद्यार्थियों ने नहरों के पूर्ण कंक्रीटीकरण के संभावित पर्यावरणीय प्रभावों की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई।
बच्चों ने बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान सुझाते हुए बाढ़ के अतिरिक्त पानी को बड़े-बड़े जलाशयों में संग्रहित करने की बात कही। इससे एक ओर बाढ़ की विभीषिका को कम किया जा सकता है, वहीं दूसरी ओर भूजल स्तर में सुधार तथा सिंचाई के लिए जल की उपलब्धता बढ़ाई जा सकती है।
नाटक में ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के लिए मत्स्यपालन, मुर्गीपालन, बत्तखपालन, वृक्षारोपण तथा जल आधारित अन्य गतिविधियों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। विद्यार्थियों का संदेश था कि बिहार में उपलब्ध जल संसाधन और मानव संसाधन का बेहतर समन्वय कर रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं और बेरोजगारी की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
बाल संसद के माध्यम से बच्चों ने मध्य विद्यालय अमौना में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए आवश्यक भौतिक एवं शैक्षणिक संसाधनों को उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई। विद्यार्थियों ने विद्यालय में बेहतर शिक्षण व्यवस्था, आवश्यक आधारभूत संरचना और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए जरूरी सुविधाओं की ओर संबंधित विभाग के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित किया।
मंचन के दौरान बच्चों ने विभिन्न भूमिकाओं का जीवंत अभिनय करते हुए सामाजिक और विकास से जुड़े गंभीर मुद्दों को सरल एवं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में उपस्थित डायट के प्राचार्य मो. मोईनुद्दीन खान ने विद्यार्थियों की अभिनय कला, संवाद प्रस्तुति और विषय चयन की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यालय में होने से,बच्चों में नेतृत्व क्षमता,आत्मविश्वास, टीम भावना,अभिव्यक्ति कौशल, सामाजिक चेतना और लोकतांत्रिक मूल्यों को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों एवं शिक्षकों ने बच्चों के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि बाल संसद केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को समाज और देश की समस्याओं को समझने तथा उनके समाधान के लिए सोचने का प्रभावी माध्यम है। बच्चों द्वारा उठाए गए जल, पर्यावरण, रोजगार और शिक्षा से जुड़े मुद्दों ने कार्यक्रम को विशेष रूप से सार्थक बना दिया।
कार्यक्रम में समाजसेवी शत्रुध्न यादव, विद्यालय के प्राचार्य मुरली कुमार, वरिष्ट शिक्षक राकेश कुमार, राजीव कुमार के साथ दर्जनों शिक्षक उपस्थित थे।
